किशनगंज, मार्च 2 -- किशनगंज। एक संवाददाता होली का त्योहार जहां जीवन में खुशियों और उमंग लेकर आता है और होली को लेकर लोगों में कई दिन पहले से ही एक अलग उत्साह देखने को मिलता है। लेकिन होली का त्यौहार अब परंपरा तक सिमट कर रह किया गया है। यदि नई पीढ़ी को लोकसंस्कृति से जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में फाग और जोगीरा केवल स्मृतियों तक सीमित रह जाएंगे। हाल के कुछ वर्षों में यह त्यौहार होली के दिन ही दिखता है जबकि आज से डेढ़ दशक पहले होली के कई दिन पहले से ही लोग होली के रंग में रंग जाते थे। हम बात करें किशनगंज शहर की तो शहर में डेढ़ दशक पहले होली को लोग महीना पहले से ही इंजॉय करते थे। खासकर मारवाड़ी समाज के लोगों में होली को लेकर पहले से खास तैयारी करते थे और राजस्थान से चंग पार्टी को बुलाकर होली के गीत गाकर और चंग और धमाल के स...