छपरा, मार्च 2 -- छपरा। फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या पर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में होलिका दहन का पर्व पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। विभिन्न मोहल्लों, चौक-चौराहों और गांवों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया गया। इस दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान विष्णु की कृपा से होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई थीं, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित रहे। इसी आस्था के साथ लोग बुराइयों, नकारात्मकता और आपसी द्वेष को अग्नि में समर्पित कर नए सवेरे का स्वागत करते हैं। होलिका दहन से पूर्व श्रद्धालुओं ने ...