कुशीनगर, मार्च 2 -- होलिका दहन सोमवार की आधी रात बाद होगी। वहीं होलिकोत्सव ( होली) 4 मार्च दिन बुधवार को सर्वत्र मनाई जाएगी। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए देवाधिदेश भगवान शिव का पूजन करना लाभकारी होता है। महर्षि पराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि होली सनातन धर्म का एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक त्योहार है। आध्यात्म का अर्थ है मनुष्य का ईश्वर से सम्बन्ध होना या स्वयं का स्वयं के साथ सम्बंधित होना है। इस लिए होली मानव का परमात्मा से एवं स्वयं से स्वयं के साक्षात्कार का पर्व है। होली रंगों का त्योहार है। रंग सिर्फ प्रकृति और चित्रों में ही नहीं हमारी आंतरिक ऊर्जा में भी छिपे होते हैं। बताया कि होलिका दहन सोमवार को रात्रि में 11.55 से 12.52 बजे के मध्य किया जाएगा, क्यों कि 2 मार्च को सायं काल से ही भ...