नई दिल्ली, फरवरी 3 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। नोएडा में मुस्लिम धर्मगुरु पर हुए हमले के मामले में दर्ज प्राथमिकी में पुलिस द्वारा हेट क्राइम से जुड़ी धाराएं नहीं लगाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि 2021 में दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 153बी और धारा 295ए जैसे प्रावधान क्यों नहीं जोड़े गए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद कहा कि राज्य सरकार के पास अब केवल दो ही विकल्प हैं। या तो वह संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करे या फिर अदालत को इसके लिए आदेश पारित करना पड़ेगा। मामले से जुड़ी पूरी जानकारी देने के लिए पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक सप्ताह का समय दिया। पीठ काजीम अहमद शेरवानी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रह...