ओम प्रकाश सती, मई 12 -- आयुर्वेद का अमृत माने जाने वाले च्यवनप्राश की आठ दुर्लभ जड़ी-बूटियां हिमालय से तेजी से गायब हो रही हैं। इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कई दवाओं को बनाने में भी किया जाता है। लुप्त होने वाली बूटियों में काकोली, क्षीर काकोली, जीवक और ऋषभक विलुप्ति के कगार पर हैं। महामेदा, मेदा, रिद्धि और वृद्धि पर भी संकट है। करीब 2500 से 4500 मीटर ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में मिलने वाली इन जड़ी-बूटियों पर अनियंत्रित दोहन और जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। वन विभाग की अनुसंधान शाखा हर्षिल में नर्सरी बनाकर इनके संरक्षण में जुटी है। शोध में इन जड़ी-बूटियों पर मंडरा रहे विलुप्ति के खतरे का खुलासा हुआ है। अष्टवर्ग की ये जड़ी-बूटियां हिमालयी आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में शामिल हैं। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में खनन के ...