नैनीताल, अप्रैल 8 -- नैनीताल। डीएसबी परिसर में बुधवार को हिमांशु विश्वकर्मा की कहानी 'बावर की वनकन्या' पर साहित्यिक परिचर्चा आयोजित की गई। जिसमें प्रो. शिरीष कुमार मौर्य ने जौनसार-बावर क्षेत्र की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिमांशु विश्वकर्मा की कहानी 'बावर की वनकन्या' इस क्षेत्र की कुप्रथाओं और जटिल यथार्थ को मुखरता से सामने लाती है। प्रो. मौर्य ने शोधार्थियों और प्राध्यापकों को रचनात्मक लेखन और आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करने के लिए प्रेरित किया l उन्होंने कहा कि रचना का महत्व पुरस्कार से नहीं, बल्कि प्रतिष्ठित मंच पर प्रकाशित होने से बढ़ता है l मेधा नैलवाल ने हिमांशु विश्वकर्मा के रचनात्मक संघर्ष को रेखांकित करते हुए कहा, कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और कविता, कहानी, अनुवाद और आलोचनात्मक शोध जैसे व...