नई दिल्ली, मई 20 -- कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा एक हिंदू महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने के फैसले को सही ठहराया। महिला ने मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार एक पुरुष से शादी की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है कि एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को तब तक भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है, जब तक कोई सक्षम अदालत उस शादी को अमान्य घोषित नहीं कर देती। पति द्वारा कथित तौर पर छोड़ दिए जाने और घरेलू हिंसा के बाद, महिला ने पश्चिम बर्धमान जिले की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने महिला को 5,000 रुपये और अपने नाबालिग बेटे के लिए 4,000 रुपये का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। एक पुनरीक्षण अदालत ने फरवरी 2024 में मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था। जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने कहा कि पुनरीक्षण अदालत...