नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- हिंदू परिवार में मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता? गरुड़ पुराण में बताए गए सूतक काल के नियम, कारण और महत्व जानिए। मृत्यु के बाद चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा आत्मा की शांति, परिवार के शोक और घर की शुद्धि के लिए है। सूतक काल में क्या करें और क्या ना करें, विस्तार से पढ़ें। सनातन धर्म में जीवन के हर चरण के लिए स्पष्ट नियम और संस्कार निर्धारित किए गए हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें अंतिम संस्कार यानी अंत्येष्टि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मृत्यु के बाद परिवार को शोक, शुद्धि और आत्मा की शांति के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। इन नियमों में सबसे प्रमुख है - मृत्यु के तुरंत बाद चूल्हा ना जलाना। गरुड़ पुराण में इस पर विस्तार से चर्चा की गई है। आइए जानते ह...