नई दिल्ली, जनवरी 26 -- हिंदू परिवारों में पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा बहुत पुरानी और गहरी है। बड़ों के पैर छूना सम्मान, श्रद्धा और आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसी परंपरा में एक खास नियम है - बेटियों को पैर नहीं छूने दिया जाता है। कई परिवारों में यह नियम आज भी सख्ती से निभाया जाता है। यह नियम केवल रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि हिंदू धर्म में बेटियों को पैर छूने से क्यों रोका जाता है।बेटी को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है हिंदू धर्म में बेटी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। लक्ष्मी जी धन, समृद्धि, सौभाग्य और सुख की देवी हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि बेटी घर में लक्ष्मी का आगमन है। जब बेटी पैदा होती है, तो परिवार में सुख-समृद्धि और ख...