नई दिल्ली, फरवरी 17 -- हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा, विवाह, गृहप्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' कहा जाता है। शुभ कार्यों में सबसे पहले इनका नाम लिया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। लेकिन इस परंपरा के पीछे एक गहरी पौराणिक कथा छिपी है। शिव पुराण और अन्य पुराणों में वर्णित इस कथा से पता चलता है कि गणेश जी को प्रथम पूज्य का दर्जा कैसे प्राप्त हुआ। आइए जानते हैं इस कथा और महत्व को।देवताओं में छिड़ा श्रेष्ठता का विवाद शिव पुराण और गणेश पुराण में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार सभी देवताओं के बीच यह विवाद छिड़ गया कि धरती पर सबसे पहले किसकी पूजा होनी चाहिए। इंद्र स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानते थे, कार्तिकेय अपनी शक्ति का दावा करते...