प्रभात कुमार, अप्रैल 23 -- Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को कहा कि किसी धार्मिक संप्रदाय की किसी खास प्रथा को जरूरी या गैर-जरूरी घोषित करने के लिए कोई एक तय नियम या सार्वभौमिक दिशा-निर्देश बनाना कोर्ट के लिए बहुत मुश्किल है। पीठ ने कहा कि ऐसा इसलिए, क्योंकि हर धर्म की अपनी अनूठी परंपराएं होती हैं। पीठ ने यह भी कहा कि हिंदू समाज को अलग-अलग संप्रदायों में बंटने के बजाय एकजुट होना चाहिए, नहीं तो वह कमजोर हो जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने कहा कि यदि कोई खास हिंदू धार्मिक संप्रदाय कुछ प्रथाओं का पालन करता है तो उन सभी को जरूरी धार्मिक प्रथाएं नहीं कहा जा सकता, यदि वे नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं। पीठ ने केरल के सबरीमाला मंदिर सहित विभिन्न ...