रांची, मार्च 2 -- रांची, संवाददाता। रंगों का त्योहार होली खुशियों और आपसी सौहार्द का प्रतीक है, लेकिन जरा सी असावधानी स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। रांची के फिजिशियन डॉ प्रतीक ने लोगों से अपील की है कि होली खेलते समय त्वचा, आंख और श्वसन तंत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें डॉ प्रतीक सिन्हा ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों में हानिकारक रसायन मिले होते हैं, जो त्वचा पर एलर्जी, खुजली, रैशेज और जलन का कारण बन सकते हैं। कई मामलों में आंखों में संक्रमण और सांस की दिक्कत होती है। उन्होंने सलाह दी कि केवल प्रमाणित हर्बल या प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें और अज्ञात स्रोत से खरीदे गए सस्ते रंगों से बचें...
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