नई दिल्ली, अप्रैल 4 -- राजस्थान हाईकोर्ट ने उभयलिंगी आरक्षण पर अपने हालिया फैसले के कुछ अंशों में संशोधन किया है, जिसमें अदालत ने उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 पर गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा था कि यह अधिनियम ट्रांसजेंडरों के अपने लिंग की पहचान स्वयं करने के अधिकार को छीन लेता है। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने अंशों को पूरी तरह से हटाने से इनकार कर दिया, लेकिन इस बात पर सहमति जताई कि इसमें कुछ अनुच्छेद नहीं होने चाहिए थे। अंशों से संबंधित स्पष्टीकरण की मांग कर रहे 29 वर्षीय उभयलिंगी याचिकाकर्ता के वकील विवेक माथुर ने कहा कि अदालत ने स्पष्टीकरण देने के साथ कुछ अंशों को हटाने का आदेश दिया है जो अदालत के अनुसार गलती से शामिल हो गए थे, लेकिन इन्हें शामिल किये जाने की न तो मंशा...