नई दिल्ली, मार्च 6 -- हस्तरेखा शास्त्र में शनि पर्वत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मध्यमा उंगली (मिडिल फिंगर) के ठीक नीचे स्थित उभरा हुआ भाग होता है। शनि ग्रह कर्म, अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और न्याय का प्रतीक है। शनि पर्वत की स्थिति, उभार, रेखाएं और चिह्न व्यक्ति के जीवन में मेहनत, सफलता, भाग्य और चुनौतियों का संकेत देते हैं। यदि यह संतुलित हो तो भाग्य साथ देता है, अन्यथा जीवनभर संघर्ष करना पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं शनि पर्वत के विभिन्न रूप और उनके प्रभाव।शनि पर्वत क्या है और कहां स्थित होता है? हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, शनि पर्वत हथेली के बीच में मध्यमा उंगली के मूल पर होता है। यह भाग्य रेखा (शनि रेखा) का अंतिम बिंदु भी होता है। यह पर्वत व्यक्ति के कर्म फल, मेहनत, जिम्मेदारी और जीवन की स्थिरता को दर्शाता है। शनि पर्वत क...