सीतामढ़ी, जुलाई 9 -- रमेश कुमार परिहार। सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले व विकास के बड़े-बड़े दावे भी हुए, लेकिन भारत-नेपाल सीमा से सटे परिहार प्रखंड के लोगों को आज तक बाढ़ की स्थायी समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकी है। यह भी पढ़ें- रातो बनी अभिशाप, उड़ाही, तटबंध निर्माण नहीं होने से खेती भी बर्बादबाढ़ का खतरा हर वर्ष मानसून की दस्तक के साथ प्रखंड के दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ते ही लोगों के घरों, खेतों व सपनों पर पानी फिर जाता है। वर्षों से चली आ रही यह समस्या आज भी क्षेत्रवासियों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं हैं। प्रखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश का सीधा असर यहां की नदियों पर पड़ता है। मरहा, हरदी समेत अन्य छोटी-बड़ी नदियां उफान पर आ जाती है और आसपास...