नई दिल्ली, मार्च 2 -- अनिल त्रिगुणायत, पूर्व राजदूत, जॉर्डन ईरान-इजरायल जंग में भारत का कूटनीतिक कदम संतुलित ही कहा जाएगा। वास्तव में, 2014-15 के बाद से हमने अपने रिश्ते को 'डी-हायफनेट' किया है। इसका मतलब है, हम तमाम देशों से द्विपक्षीय संबंध बनाने लगे हैं, पर वह एक-दूसरे के अधीन नहीं है। मसलन, हमारे रिश्ते यदि इजरायल के साथ हैं, तो ईरान के साथ भी हैं और उन दोनों की आपसी दुश्मनी से हमारा संबंध प्रभावित नहीं हो रहा। मध्यपूर्व में तो हमने कई 'रणनीतिक साझेदारियां' की हैं, जिनमें इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मिस्र जैसे सभी देश शामिल हैं। अभी चूंकि हमारे तीनों 'स्ट्रैटिजिक साझेदार' (ईरान, इजरायल व अमेरिका, जो हमारा 'ग्लोबल कॉम्प्रिहेंसिब स्ट्रैटिजिक पार्टनर' है), जंग में उलझे हुए हैं, इसलिए हमारा किसी एक देश की तरफदारी न कर...