नई दिल्ली, फरवरी 24 -- गैसलाइटिंग एक तरह का इमोशनल मैनिपुलेशन (भावनात्मक हेरफेर) है जिसमें एक व्यक्ति जानबूझकर दूसरे को अपनी सोच, यादों और भावनाओं पर शक करने पर मजबूर कर देता है। धीरे-धीरे पीड़ित व्यक्ति को लगने लगता है कि शायद वही गलत है, जरूरत से ज्यादा सोच रहा है या चीज़ों को बढ़ा-चढ़ाकर देख रहा है। यह व्यवहार अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे रिश्ते में जगह बनाता है। शुरुआत में यह छोटी बातों से शुरू होता है, लेकिन समय के साथ व्यक्ति की सेल्फ-कॉन्फिडेंस और आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाता है।गैसलाइटिंग के आम उदाहरण'तुम बहुत ज्यादा सोचते हो।''ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, तुम याददाश्त में गलती कर रहे हो।''तुम हमेशा ड्रामा करते हो।''अगर तुम इतने सेंसिटिव ना होते तो प्रॉब्लम ही नहीं होती।' इन वाक्यों का मकसद सामने वाले की भावनाओं को अवैध ठहराना और उ...
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