मेरठ, सितम्बर 11 -- जिंदगी में समस्याएं तो आएंगी ही पर हमें चुनना है कि इनका कैसे करें। आज हर छोटी बात पर हम सुसाइड की सोचते हैं लेकिन हमारे पास जीवन का उद्देश्य है तो हम इस रास्ते को कभी नहीं चुनेंगे। सीसीएसयू कैंपस स्थित महिला अध्ययन केंद्र द्वारा मानसिक स्वास्थ्य मिशन इंडिया के सहयोग से रानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स हॉस्टल में 'आत्महत्या रोकथाम चेतावनी संकेतों की समझ और निवारक उपाय विषय पर हुई वर्कशॉप में यह बात मनोवैज्ञानिक प्रो.संजय कुमार ने कही। मनोवैज्ञानिक प्रो. पूनम देवदत्त ने कहा कि दुनिया में हर साल करीब आठ लाख लोग सुसाइड करते हैं। इसमें युवा सर्वाधिक हैं। यदि कोई उनकी बात सुनने वाला होता या उन्होंने अपनी बात किसी से कही होती तो शायद वो ये कदम नहीं उठाते। मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रो. दिनेश कुमार, समन्वयक प्रो. बिंदु शर्मा ने भी विचार...
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