नई दिल्ली, मार्च 12 -- सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से मरणासन्न स्थिति में जी रहे हरीश राणा को कष्ट से मुक्त करने की उनकी माता-पिता की मांग मान ली है। निस्संदेह, काफी सोच-विचार के बाद यह फैसला सुनाया गया है, पर हमें यह प्रयास भी करना चाहिए कि यह फैसला आने वाले दिनों में इच्छा मृत्यु का बहाना न बन सके। इच्छा मृत्यु की मांग को मानना परोक्ष रूप से चमत्कार होने की उम्मीदों का तोड़ देना भी है। विडंबना ही है कि एक तरफ इच्छा मृत्यु की मंजूरी की खबर आई, तो दूसरी तरफ, पीलीभीत से एक चमत्कार की खबर सामने आई, जिसमें एक 'ब्रेन डेड' महिला की सांसें चमत्कारिक रूप से गड्ढे के झटके से लौट आई। माना कि हरीश राणा का केस बेहद ही अलग है और उनके परिजनों को इच्छा मृत्यु की मंजूरी का फैसला राहत ही देगा, परंतु अब संभव है कि हर वह व्यक्ति इच्छा मृत्यु की मांग करेगा, जो ...