हमारी राष्ट्र-चेतना को क्या हुआ?
नई दिल्ली, मई 16 -- 'आजादी को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसके लिए सतत जागरूकता, शक्ति और संयम की आवश्यकता होती है।... आप चाहे किसी भी धर्म, दल या समूह से हों, मैं आप सबको इस महान संघर्ष में भागीदारी के लिए आमंत्रित करता हूं, जो हम पर थोपा गया है। मुझे अपनी जनता पर, अपने इस उद्देश्य पर और अपने देश के भविष्य पर पूरा भरोसा है...।' जवाहरलाल नेहरू का यह भाषण 22 अक्तूबर, 1962 को आकाशवाणी से प्रसारित हुआ था। उस समय भारत चीन के आक्रमण से आक्रांत था और उत्तरी सीमा पर जूझ रही हमारी सेना को तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। संयम और राष्ट्रीय संपदा में जन-योगदान के इस आह्वान को जबरदस्त जन-समर्थन हासिल हुआ था। मसलन, उन दिनों तमिलनाडु में चल रहा अलगाववादी आंदोलन थम गया था। राजस्थान के एक गांव के सभी परिवारों ने अपने बेटों को फौज में भेजने क...
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