मिर्जापुर, जनवरी 24 -- मिर्जापुर। सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों ने जेवर बनाने वाले हुनरमंदों के हाथ से काम छीन लिया है। काम के अभाव में कारीगरों ने सोन-चांदी के जेवर निर्माण के लिए काम आने वाले वनकमाल (फुंकने वाली पाइप) को हाथ नहीं लगाया है। कारीगरों का कहना है कि लगभग 75 प्रतिशत से अधिक काम महंगाई की भेंट चढ़ गया है। हालत यह है कि सहालग के समय में भी सोना-चांदी गलाने वाली भठ्ठियां ठंडी पड़ी हैं। वसंत पंचमी के अवसर पर चांदी गलाने, जेवर गढ़ने के लिए प्रसिद्ध नगर के गणेशगंज मोहल्ले के मंधर पंडित की गली में सन्नाटा पसरा रहा। यह हाल तब से है जब से सोने-चांदी की कीमतों में आग लगी है। जेवर निर्माण में लगे कारीगरों की निराशा और हताशा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो दशक से झुमका, सोने की चेन, अंगूठी और बाली आदि बनाने का काम करने वाले कृष्ण...