नई दिल्ली, फरवरी 27 -- पूरे सप्ताह मन लगाकर कड़ी मेहनत करने के बाद संडे का दिन हर व्यक्ति की लाइफ में सुकून और चैन की नींद लेकर आता है। रविवार वह खास दिन है, जब आप अपने परिवार के साथ कुछ पल हंसी-खुशी के गुजारने के साथ अगले पूरे हफ्ते अच्छा काम करने के लिए मन में ऊर्जा भरते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं संडे का यह सुकून हमें मुफ्त में नहीं मिला है। इसके लिए नारायण मेघाजी लोखंडे जैसे नायकों को कड़े संघर्ष से होकर गुजरना पड़ा है। आज जिस रविवार को हम अपना हक समझते हैं वो कभी हफ्ते के सातों दिन काम करने वाले मजदूरों के लिए एक ख्वाब हुआ करता था। मिलों की चहारदीवारी में दम तोड़ती इंसानियत को सुकून का एक दिन दिलवाने के लिए 7 साल की लंबी लड़ाई लड़ी गई है। रविवार का इतिहास, कोई आराम की दास्तां नहीं बल्कि अपने हकों के लिए खड़े होने की एक गौरवशाली क्रांत...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.