नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- नरक चतुर्दशी (07 नवंबर 2026) को मनाने के पीछे कई कथाएं हैं और हर कथा इसे एक अलग नाम भी देती है। नरक चतुर्दशी : कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया था, इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाते हैं। आइए इस दिन क्या महत्व है और इस दिन कैसे पूजा की जाती है। इस रूप चतुर्दशी से लेकर काली चौदस, यमदीपदान आदि सभी इसी दिन मनाई जाती हैं। यहां आप विस्तार से जानें रूप चतुर्दशी क्यों कहते हैं? नरकासुर का वध करने के पश्चात कृष्ण ने अपने शरीर पर लगे रक्त के छीटों को तेल-उबटन से साफ कर स्नान किया था। इससे उनका रूप फिर से निखर आया था, इसलिए इस पर्व को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन तेल-उबटन लगाकर स्नान करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सौंदर्य भी बढ़ता है। इससे जुड़ी एक कथा और भी है।...