देहरादून, फरवरी 27 -- देहरादून, अंकित कुमार चौधरी। अदालत में जब कोई आरोपी बरी होता है, तो कानून की नजर में वह निर्दोष साबित हो जाता है। इस सब के बीच एक सवाल जो फाइलों के ढेर में कहीं दफन होकर रह जाता है, वह यह है कि जिसकी हत्या हुई उसे मारने वाले कौन है? ऐसे ही कई सवाल देहरादून में हुए हत्याकांडों में आए फैसले के बाद तैर रहे हैं। देहरादून में हुए हत्याकांडों में हाल में आए अदालती फैसलों ने उत्तराखंड पुलिस जांच करने की शैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या जैसे जघन्य अपराधों में पुलिस की जांच मनगढ़ंत कहानियों और साक्ष्यों के अभाव में ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है। नतीजा यह है कि सालों तक जेल में रहने के बाद आरोपी बरी हो रहे हैं और पीड़ित परिवार न्याय की आस में आज भी वहीं खड़े हैं, जहां वारदात के दिन थे। विकासनगर से लेकर डोईवाला और ऋ...