बांका, जनवरी 15 -- धोरैया (बांका), संवाद सूत्र। हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने वाली श्रीपाथर प्रशाखा नहर आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जिस नहर को प्रखंड क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा माना जाता है, वही नहर समय पर सफाई और मरम्मत के अभाव में किसानों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। नहर की दुर्दशा का खामियाजा सीधे तौर पर किसान झेल रहे हैं, जिनकी फसलें समय पर पानी नहीं मिलने के कारण खेतों में ही सूखकर दम तोड़ देती हैं। धोरैया प्रखंड के लगभग बीचोंबीच से गुजरने वाली यह नहर वर्षों पूर्व इस उद्देश्य से बनाई गई थी कि क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों मौसम में पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके। लेकिन विडंबना यह है कि विभागीय उदासीनता, नियमित सफाई के अभाव और जगह-जगह टूटे आउटलेट्स की मरम्मत नहीं होने के कारण यह नहर अ...