हजारीबाग, जून 18 -- हजारीबाग, हमारे प्रतिनिधि। अपने अखबार हिंदुस्तान रक्तदान महाअभियान के तहत हजारीबाग में नौवें दिन का मंथन एक गंभीर सवाल पर आकर थम गया है कि आखिर शहर में रक्तदान के प्रति घटता रुझान और सुस्त पड़ती संस्थागत भागीदारी का जिम्मेदार कौन हैं शहर के ब्लड बैंकों में लगातार बनी रहने वाली खून की कमी और लाइफ-सेविंग मुहिम में स्थानीय संस्थाओं की उदासीनता ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो हजारीबाग में स्वैच्छिक रक्तदान की दर मांग की तुलना में बेहद चिंताजनक है। जिले के कॉलेजों में एनएसएस और एनसीसी जैसी सक्रिय इकाइयां मौजूद हैं, लेकिन रक्तदान शिविरों का आयोजन अक्सर औपचारिकताओं और कागजों तक ही सीमित है। वहीं, शहर के कई एनजीओ केवल जयंती या विशेष त्योहारों के दिन फोटो-अवसर के लिए शिविर लगाते हैं...