हजारीबाग प्रशासन द्वारा नो इंट्री लगाने से 30 किमी की जगह 75 किमी की परिक्रमा लगा रहे ट्रांसपोर्टर
चतरा, मई 17 -- टंडवा निज प्रतिनिधि एनटीपीसी और सीसीएल के कोल उत्पादन से चतरा जिले के विनाश और बर्बादी के पिच पर हजारीबाग लगा रहा है विकास का चौका छक्का । एनटीपीसी के कोल खनन और कारोबार से विकास तो हजारीबाग की हो रही है तो सवाल उठ रहा है कि है विनाश और बर्बादी की झूला चतरा क्यों झूल रहा है। यह बड़ा सवाल झारखंड की हर जूबान पर है? दरअसल हजारीबाग जिले के केरेडारी में एनटीपीसी की दो कोल खदानों से हर रोज तीस हजार टन कोयले की डिस्पैच चतरा जिले के टंडवा सिमरिया के सड़कों से हो रही है। इतना ही नहीं अब सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल माइंस से भी कोयला डिस्पैच करने की तैयारी चल रही है। यह भी पढ़ें- आम्रपाली से हर रोज 30 हजार टन कोयले की होती है डिस्पैच विधायक प्रतिनिधि बिनय कुमार सिंह कहते हैं कि नियमत: जिस जिले में कोयला उत्पादन हो रही है उस जिले के सर्वांग...
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