बरेली, फरवरी 15 -- बरेली। विंडरमेयर थिएटर फेस्टिवल के छठवें दिन दिल्ली के साइक्लोरामा ग्रुप के कलाकारों ने दिवंगत शायर और नाटककार इरशाद खान सिकंदर का लिखा नाटक ठेके पर मुशायरा प्रस्तुत किया। इसके निर्देशक दिलीप गुप्ता हैं। यह नाटक मुशायरों के व्यावसायीकरण पर कटाक्ष करता है और उर्दू शायरी की मौजूदा स्थिति पर चिंतन भी। नाटक जताता है कि अब अच्छी शायरी की जगह गिरोहबंदी, तुकबंदी और चलताऊ गलेबाजी को बढ़ावा मिल रहा है। नाटक में दिखाया गया है कि उस्ताद शायर कमान लखनवी की माली हालत खस्ता है। महीनों से घर का किराया नहीं दे सके हैं। मकान मालिक ने घर से बाहर करने की धमकी दी है। राम भरोसे गालिब नाम का शायर सलाह देता है कि एक ओपन माइक से पैसों का जुगाड़ हो सकता है। ठेकेदार छांगुर के माध्यम से ओपन माइक की सेटिंग की जाती है। उस्ताद न चाहते हुए भी ठेके पर म...