नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति केवल नौकरी छोड़ने या बंद करने का कार्य नहीं है। यह कर्मचारी का एक विशिष्ट अधिकार है जो जरूरी सालों की सेवा पूरी होने पर मिलता है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने एक बैंक की ओर से दायर अपीलों पर अपना फैसला सुनाया। इन अपीलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 2019 के दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने एक बैंक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम लाभ देने का निर्देश जारी किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नोटिस में बताई गई तीन महीने की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद या सेवा में उपस्थित होना बंद करने की तारीख से, उसे स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त माना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि कर्मचारी की नियुक्ति सितंबर 1983 में...