औरैया, मई 22 -- औरैया, संवाददाता। स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में आती हैं। उन्होंने आम लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि इलाज के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही या अस्पताल की मनमानी सामने आने पर मरीज और उनके परिजन उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर न्याय और क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के मध्यस्थता प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अधिवक्ता ने कहा है कि संजीव पांडेय ने बताया कि आपात स्थिति में तीमारदारों की हड़बड़ी और मजबूरी का फायदा उठाकर कई निजी अस्पताल संचालक सादे कागजों या बारीक लिखावट वाले सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करा लेते हैं। बाद में इलाज में चूक या लापरवाही सामने आने पर प्रबंधन इन्हीं दस्तावेजों का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है। यह भी पढ़ें- मरीज के परिवार को डॉक्टर देंगे 2...