बरेली, मई 13 -- स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल करने के लिए लोगों की आभा आईडी बनाने की मुहिम कई जिलों में पिछड़ गई है। गाजियाबाद, कानपुर और लखनऊ जैसे महानगरों समेत 28 जिले प्रदेश के औसत से भी काफी पीछे चल रहे हैं। प्रदेश में करीब 62 प्रतिशत लोगों की आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट) आईडी बन चुकी है। शासन ने निर्देश दिया है कि आभा आईडी बनाने के काम में तेजी लाई जाए। मंगलवार को शासन स्तर से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की समीक्षा की गई। प्रदेश में अब तक कुल आबादी के लगभग 62 प्रतिशत लोगों की ही आभा आईडी बन सकी है। प्रदेश के 28 जिले इस औसत से पीछे हैं। गाजियाबाद और कानपुर नगर में अब तक 51 प्रतिशत लोगों की आईडी बनी है और दोनों जनपद प्रदेश में आभा आईडी बनाने में सबसे पीछे हैं। जालौन में 55 प्रतिशत, लखनऊ और बलरामपुर में 56 प्रतिशत आबादी की आभा आई...
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