नई दिल्ली, जून 1 -- दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को केवल कागजी प्रक्रिया या कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा मानकर नहीं देखा जा सकता। यह संकट के समय मरीज का सहारा है। अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें इलाज के दौरान इंश्योरेंस क्लेम ठुकराए जाने से मरीज की हालत बिगड़ने और मौत तक पहुंचने के आरोप लगे हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल की अदालत ने मेडी असिस्ट इंश्योरेंस टीपीए प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हर मेडिक्लेम फाइल के पीछे एक परिवार की उम्मीद और संघर्ष छिपा होता है। अदालत ने कहा कि जब कोई परिवार अपने प्रियजन को गंभीर बीमारी से जूझते देखता है, तो ऐसे में मेडिक्लेम क्लेम का खारिज होना महज पॉलिसी की शर्त नहीं, बल्कि उम्मीद के टूटने जैस...