किशनगंज, जुलाई 2 -- किशनगंज। निज संवाददाता एक मां का स्वस्थ रहना केवल उसके अपने जीवन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उसके गर्भ में पल रहे शिशु के भविष्य की भी मजबूत नींव रखता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हो, तो इसका असर मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले शिशु का जन्म, प्रसव के दौरान जटिलताएं और मातृ मृत्यु का बढ़ा हुआ जोखिम जैसी कई गंभीर समस्याएं एनीमिया से जुड़ी हो सकती हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम को सुरक्षित मातृत्व की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक मानते हुए नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण और पोषण परामर्श पर विशेष जोर दे रहा है。

एनीमिया मुक्त गर्भावस्था की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी सिविल सर्जन...