बागपत, अप्रैल 6 -- कस्बे के श्री विश्वकर्मा मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में रविवार को पंचवटी में स्वर्ण मृग भेजकर छल से सीता मां का रावण हर ले जाने का प्रसंग सुनाया गया। पंचवटी लौटने पर राम लक्ष्मण के मार्मिक संवाद से श्रोता भावविभोर हो गए। वृंदावन से पधारे कथावाचक गिरधारी लाल शास्त्री ने श्रीराम के आदर्श जीवन का वर्णन करते हुए बताया कि वनवास के दौरान पंचवटी में प्रवास के दौरान रावण की बहन सरूपनखा जबरन राम से विवाह करना चाहती है। नाराज होकर मां सीता पर राक्षसी रूप मे ंहमला कर देती है। नाराज लक्ष्मण सरूपनखा की नाक को काट देता है। बहन के अपमान का बदला लेने को लंकापति रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर पंचवटी भेजता है। मृग का पीछा करने राम के बाद लक्ष्मण भी चले जाते है। छल से रावण सीता मां का हरण कर लेता है। पुजारी पंडित रामेश्वर, मुकेश गुप्ता ...