प्रयागराज, मार्च 29 -- स्मार्ट सिटी की गिरफ्त में आते जा रहे शहरों में स्मृतिहीनता बढ़ रही है। अपने ऊपर पूर्वजों का जो उपकार है उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का वक्त नहीं है। शहरों में स्मृतियों को संजोने का कोई काम नहीं हो रहा। यह अभूतपूर्व समय है। स्मृति, कल्पनाशीलता, संवेदना और मानवता पर हमला हो रहा है। पहले विचारधारा होती थी अब विचार कम है धारा ज्यादा है। ऐसे समय में गोपेश समग्र का प्रकाशन एक तरह से स्मृति ग्रंथ का प्रकाशन है। गोपेश की जो छवि बनती है वह यह कि उनकी वजह से एक कालखंड में इलाहाबाद में साहित्य संभव हुआ। इस आयोजन ने मेरे मन में इलाहाबाद को लेकर जो नकारात्मक छवि बनी उसे तोड़ने का काम किया। यह विचार बतौर मुख्य अतिथि कवि, आलोचक व संपादक अशोक वाजपेई ने रविवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में आयेाजित जनार्पण गोपेश समग...
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