स्थूल और सूक्ष्म जगत का मिलन ही साधना
श्री श्री आनंदमूर्ति, जून 9 -- मनुष्य की जिज्ञासाओं में एक प्रश्न सदा रहा है- क्या केवल पदार्थ ही सत्य है या उसके पीछे कोई चेतन सत्ता भी है? यदि ईश्वर या आत्मा का अस्तित्व है, तो वह दिखाई क्यों नहीं देती? सामान्यतः भौतिकवादी दृष्टिकोण वाला व्यक्ति यही प्रश्न उठाता है कि जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, उसके अस्तित्व को कैसे स्वीकार किया जाए? इस प्रश्न का उत्तर कठोपनिषद् में मिलता है। उपनिषद् कहता है कि परमात्मा या आत्मा प्रत्येक वस्तु और प्राणी के भीतर गहराई से विद्यमान है, किंतु वह स्थूल इंद्रियों से दिखाई नहीं देती। जैसे आकाश तत्व या ऊर्जा प्रत्येक वस्तु में उपस्थित होते हुए भी हमारी आंखों को दिखाई नहीं देती। उसी प्रकार परम चेतना भी सामान्य दृष्टि की पकड़ से परे है। उसे समझने के लिए साधारण बुद्धि नहीं, बल्कि अत्यंत सूक्ष्म, तीक्ष्ण और एका...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.