अलीगढ़, मार्च 19 -- (अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। एक समय था जब बेफिक्र बचपन की पहचान खुलकर हंसना और छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेना हुआ करता था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। युवाओं के साथ-साथ किशोरों में भी 'हैप्पीनेस इंडेक्स' लगातार गिर रहा है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। लाइक और कमेंट्स की दुनिया में उलझकर बच्चे अपनी असली खुशियों से दूर होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो 12 से 17 वर्ष के किशोर अब पहले से ज्यादा तनाव, उदासी और अकेलेपन का सामना कर रहे हैं, जो एक चिंताजनक संकेत है।प्रदेश में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। जहां पहले तनाव और अवसाद के लक्षण 35-40 वर्ष की उम्र के बाद दिखाई देते थे, वहीं अब 12 से 17 वर्ष के बच...