हजारीबाग, फरवरी 2 -- हजारीबाग चौपारण हिटी। जिले के कई सरकारी और कुछ निजी विद्यालय ऐसे हैं, जहां आज भी छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है, या फिर शौचालय जर्जर, बंद अथवा अनुपयोगी स्थिति में है। स्कूल में गर्ल्स टॉयलेट का होना लड़कियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान का सवाल है। जब तक हर स्कूल में सुरक्षित और उपयोगी गर्ल्स टॉयलेट नहीं बनता, तब तक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अधूरा ही रहेगा। शौचालय नहीं होने से उपस्थिति पर असर पड़ रहा है। बताया जाता है कि कक्षा छह के बाद छात्राओं की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कुछ विद्यालयों में बालिकाओं का ड्रॉपआउट रेट लड़कों की तुलना में अधिक है। सरकारी स्तर पर स्वच्छ भारत अभियान और समग्र शिक्षा अभियान के तहत शौचालय निर्माण की योजनाएं तो बनीं, लेकिन कई स्कूलों में आवंटन के बाद भी निर्माण शुरू...
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