फर्रुखाबाद कन्नौज, जुलाई 1 -- फर्रुखाबाद, संवाददाता। स्कूलों की घंटी बज चुकी है, पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों पर खतरा मंडरा रहा है। कहीं स्कूल की छत के ऊपर से हाइटेंशन लाइन गुजर रही है, कहीं आग बुझाने वाले सिलेंडर खाली पड़े है तो कहीं आग बुझाने की बाल्टियों में बालू की जगह कचरा भरा है तो कहीं यह खाली बाल्टियां शो पीस बनकर लटकी हुई है। परिषदीय स्कूलों की रसोई में बच्चों के लिए खाना बनता है। अधिकतर स्कूलों में रसोई क्लास रूम से सटे हुए ही हैं। अब ऐसे में अगर रसोई में आग धड़क जाती है तो इसको बुझाना आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा क्लास रूम में शॉर्ट सर्किट का भी खतरा रहता है पर आग बुझाने के इंतजाम अधिकतर स्कूलों में नाकाफी है। हिन्दुस्तान ने कई स्कूलों का रियलिटी चेक किया तो इसमें लगभग कई स्कूलों में आग बुझाने के इंतजाम फेल नजर आए।...