नई दिल्ली, मई 19 -- नितिन पई, निदेशक, तक्षशिला इंस्टीट्यूशन भारत में स्वर्ण (सोने के आभूषणों) के प्रति खासा आकर्षण है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा नहीं है, इसलिए वे गाढ़े वक्त के लिए सोना खरीदकर रख लेना चाहते हैं। यह कोई सांस्कृतिक सनक नहीं है। यह एक-दूसरे पर, समाज पर और हमारी सार्वजनिक संस्थाओं पर सामूहिक अविश्वास का परिणाम है। अर्थशास्त्री अजय शाह तो यहां तक कहते हैं कि सोना के प्रति अनुराग सभ्यता के प्रति अविश्वास को दर्शाता है। लोग जनमत सर्वेक्षणों में अपनी सरकारों व नेताओं में भरोसे के बारे में चाहे जो कहें, जब वे अन्य संपत्तियों के होते हुए सोना खरीदते हैं, तो वास्तव में अपना यकीन बता रहे होते हैं। इतिहासकार डाइटमार रोथरमुंड ने 19वीं सदी के बारे में टिप्पणी की है कि भारत में अतिरिक्त...