हल्द्वानी, मार्च 2 -- हल्द्वानी। कुमाऊं की खड़ी होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। ये शास्त्रीय संगीत, लोक संस्कृति और सामाजिक मेल-मिलाप का एक जीवंत पर्व है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के माध्यम से कुमाऊं की बैठकी और खड़ी होली ने एक नई पहचान बनाई है। युवा बदल रहे संस्कृति की गूंज कुमाऊं की वादियों में जब ढोलक और मंजीरों की थाप गूंजती है, तो वह केवल मोहल्ले तक सीमित नहीं रहती। युवा पीढ़ी इस समृद्ध विरासत को रील्स और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए दुनिया भर में पहुंचा रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर होली मंडलियों के लाइव सत्रों ने सात समंदर पार बैठे प्रवासियों को भी अपनी जड़ों से जोड़ दिया है। प्रसिद्ध काली कुमाऊं की होली, जो अपनी विशिष्ट गायन शैली और ऊर्जा के लिए जानी जाती है, आज यूट्यूब व्लॉगर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए आकर्षण का केंद्...