वरिष्ठ संवाददाता, मार्च 20 -- सोशल मीडिया के बढ़ते दखल और लाइक-कमेंट्स को बेहद संजीदगी से लेना युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रहा है। पहले तनाव, उदासी के लक्षण 35-40 वर्ष की आयुवर्ग के लोगों की परेशानी थी, लेकिन अब युवाओं, किशोर-किशोरियों का हैप्पीनेस इंडेक्स भी सोशल मीडिया तय कर रहा है, जो घटता जा रहा है। जबकि चिकित्सक भी मानते हैं कि खुश रहना-हंसना शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉनिक के समान है। प्रसन्नता-हंसी के महत्व के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस मनाया जाता है।टेली मानस ओपीडी की रिपोर्ट टेली मानस ओपीडी की हालिया रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इससे पता चलता है कि टेली मानस ओपीडी में 12-15 साल तक के बच्चे-किशोर भी काउंसिलिंग के लिए कॉल कर रहे हैं। हंसी-खिलखिलाहट से भरी रहने वाली किश...