नई दिल्ली, जुलाई 25 -- छात्र आंदोलन को मजबूती देने के लिए 26 दिनों तक जंतर-मंतर पर अनशन करने वाले सामाजिक और पार्यवरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अब पहले से ज्यादा कष्ट में हैं। भूख हड़ताल से जहां उनके शरीर को दिक्कत थी तो अब तरह-तरह की नकारात्मक टिप्पणियों से उन्हें अपार मानसिक कष्ट हो रहा है। उन्हें यह पीड़ा इसलिए भी अधिक है क्योंकि उन पर उन छात्रों की ओर से ही सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनके लिए वह इतने दिनों तक अन्न त्यागे रहे। इसके अलावा कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी उन पर समझौता कर लेने के आरोप जड़े। इन बातों से वांगचुक इतने आहत हुए कि अस्पताल के बिस्तर से करीब आधे घंटे तक अपना दर्द जाहिर करते रहे। उन्होंने ऐसे लोगों को सोच को नीच बताते हुए कहा कि धिक्कार है ऐसे देश को जहां ऐसे लोग रहते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से जंतर-मंतर ...