मेरठ, मार्च 27 -- कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 48 वें दिन मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा की मांगलिक क्रियाएं की गई। शुक्रवार को 251 परिवारों ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। विधान के मध्य मुनि भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति की सोच ही उसे अच्छाई व बुराई की ओर ले जाती है। जैसी सोच होगी वैसे ही 36 अक्षरों का प्रयोग अच्छे व बुरे रूप में करोगे। मात्र सोच को सुधार लो तो जीवन सुधर जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगना तो अपने आप में श्रेष्ठ है ही, किंतु इससे अधिक श्रेष्ठ है निश्चल भाव से क्षमा प्रदान करना। सौधर्म इंद्र बनकर स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक अमित जैन, राजीव जैन, शांतिधारा सिद्धांत जैन, मुन्नालाल जैन व आरती का दीप प्रज्वलित गौरव जैन, शरद जैन न...