बिहारशरीफ, अप्रैल 4 -- सैलानियों को 'भवसागर' पार लगाने वाली वैतरणी तरस रही स्वच्छ जल को सौंदर्यीकरण व जलस्रोत विकसित करने के नाम पर खर्च हुए करोड़ों कभी सालोंभर रहता था पानी, सूखने से स्थानीय किसान मायूस फोटो : राजगीर नदी-राजगीर के वैतरणी नदी के बीच बना पुल। राजगीर, निज संवाददाता। भवसागर पार लगाने वाली आस्था की प्रतीक और जीवनदायिनी वैतरणी नदी आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही है। कभी सालों भर जल से लबालब रहने वाली इस नदी की वर्तमान स्थिति देखकर स्थानीय लोग दुखी और आक्रोशित हैं। सबसे अधिक इसके पानी से पटवन करने वाले किसान मायूस हैं। हालांकि, नदी के सौंदर्यीकरण और जलस्रोत विकसित करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी इसका फायदा नहीं मिला। एक छोटे से हिस्से को छोड़कर पूरी नदी सूख चुके हैं। जहां पानी बचा भी है, उसमें गंद...