रांची, नवम्बर 28 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी आपराधिक मामले में रिवीजन दायर करने का अधिकार सेशन जज और हाईकोर्ट दोनों के पास होता है। यदि मजिस्ट्रेट कोई आदेश देता है तो उस आदेश को चुनौती देने के लिए सीधे हाईकोर्ट आना कानूनन गलत नहीं है। फिर भी, अदालत ने कहा कि सामान्य तौर पर पहले सेशन कोर्ट जाना ही सही तरीका माना जाता है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत बीएनएनएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 438 और 442 के तहत दायर एक रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका रामगढ़ के एसडीजेएम द्वारा आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 120बी से जुड़े मामले में याचिकाकर्ताओं को डिस्चार्ज न करने के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। सेशन कोर्ट में पहले जाना न्यायिक अनुशासन सुनवाई ...