सिद्धार्थ, अप्रैल 23 -- सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि पराली जलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से खेतों में बचे अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर खाद के रूप में उपयोग करने का आह्वान किया है। डीएम ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से खेतों की जड़, तना और पत्तियों में मौजूद लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी का तापमान बढ़ता है, जिसके कारण मृदा की भौतिक, रासायनिक और जैविक संरचना प्रभावित होती है। साथ ही खेतों में मौजूद मित्र कीट, जीव-जंतु और सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है।जिलाधिकारी यह भी पढ़ें- सेटेलाइट निगरानी में आएंगे खेत, पराली जलाने पर लगेगा जुर्...