मुरादाबाद, जून 6 -- कोठीवाल नगर स्थित गीता ज्ञान मंदिर में चल रही भक्तमाल कथा के विश्राम दिवस पर कथा व्यास कविचंद्र दास ने सूरदास का चरित्र सुनाया। उन्होंने बताया सूरदास पिछले जन्म में उद्धव थे। ललिता सखी के श्राप से उन्हें धरती पर अंधे होकर जन्म लेना पड़ा था। मात्र छह वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया। गांव वालों को शगुन बताकर जीवन यापन करने लगे। 32 वर्ष की आयु में उनकी महाप्रभु वल्लभाचार्य से भेंट हुई। उन्होंने इन्हें दीनता के पद सुनाए। वल्लभाचार्य ने इनसे कहा तुम सूर हो शूरवीर हो। फिर क्यों घबराते हो। कुछ ठाकुर जी की लीला सुनाओ। यह भी पढ़ें- सूरदास चरित्र कथा ने भक्ति के भाव किये जागृत सूरदास ने इसमें असमर्थता व्यक्त की। तब वल्लभाचार्य ने उन्हें दीक्षा देकर भागवत के दशम स्कंध की सूची सुनाई। वल्लभाचार्य ने उन्हें अपने साथ ले जाकर गो...