सूफियाना कलाम से वाहे गुरु सतनाम तक की यात्रा
वाराणसी, अप्रैल 9 -- वाराणसी। शास्त्रीय संगीत को समर्पित संकटमोचन मंदिर की अंगनाई। समारोह की तीसरी निशा की तीसरी प्रस्तुति में हनुमान वंदन हो रहा है। रुद्रावतार को गायन सुनाने के लिए बैठीं कलाकार जसपिंदर नरूला पर ठप्पा तो फिल्मी होने का है लेकिन आराधना के सुर ऐसे लगे कि हर श्रोता सुर में सुर मिलाता दिख रहा है। पारंपरिक भजनों से बढ़ते हुए गायन की यह यात्रा सूफियाना अंदाज को छूती सतनाम वाहे गुरु के सानिध्य में हे गोविंद-हे गोपाल सबद से पूर्ण हुई।मंदिर के परिक्रमा पथ के पूर्वी हिस्से में बैठे चुनार-शेरवां-अहरौरा-नारायणपुर आदि ग्रामीण परिवेश से आए श्रोताओं का समूह ताल देते भजन के बोल दोहरा रहे हैं। चुनार से आए 78 वर्षीय प्रेमनारायण मिश्र तो पानी की बोलत पर अंगुलियों से ताल देते हुए मगन हैं। इधर मंच के ठीक सामने विस्तृत आंगन में बैठे बीएचयू-वि...
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