संवाददाता, जनवरी 23 -- पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ और बाघिनों को भले ही सरकारी तौर पर कोई नाम न दिए गए हों, लेकिन जंगल सफारी पर आने वाले सैलानी और स्थानीय गाइड उनकी चाल-ढाल, चेहरे-मोहरे या फुर्ती के आधार पर उन्हें अलग-अलग नामों से पहचानने लगे हैं। कई बाघ और बाघिन अब अपने अनौपचारिक नामों से चर्चित हो चुके हैं और आकर्षण का केंद्र हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में डेली दो पालियों में जंगल सफारी के दौरान गाइड और चालक जानवरों के हाव-भाव और व्यवहार को बारीकी से परखते हैं। समय के साथ उनकी पहचान इतनी पुख्ता हो गई है कि बाघ के स्वभाव को देखकर ही गाइड सैलानियों को सतर्क कर देते हैं। अगर किसी बाघ का मिजाज कड़क और आक्रामक दिखता है तो गाइड फौरन समझा देते हैं कि शोर न करें, सुल्तान या एस-थ्री हो सकता है। वहीं, शावकों के साथ अक्सर दिखने वाली बलखाती बाघिन इ...